राष्ट्रीय हरित न्यायालय, एनजीटी द्वारा श्री देगराय मन्दिर ओरण में पेड़ काटने व बिजली लाइन बिछाने पर रोक

जैसलमेर के फतेहगढ़ तहसील के रासला, साँवता, मुलाणा, अचला, भीखसर गाँवों के बीच साठ हजार बीघा क्षेत्र में फैले 610 वर्ष प्राचीन श्री देगराय माता मन्दिर औरण को, राष्ट्रीय हरित न्यायालय द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 2018 में, टी. एन. गोड़वर्मन बनाम भारत सरकार के अंतर्गत राजस्थान सरकार को दिये आदेश, जिसमें राज्य के सभी ओरणों को डीम्ड फारेस्ट श्रेणी में दर्ज करने को कहा गया था, उस आदेश की अवमानना मानते हुए, यहाँ विभिन्न ऊर्जा कम्पनियों द्वारा चल रहे बिजली लाइन बिछाने के काम, GSS निर्माण के कार्यों, वनस्पति व पेड़ों को नुकसान पहुँचाने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। इसके साथ डीएफओ, जैसलमेर व राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की संगठित टीम को ओरण का मौका मुआयना कर निश्चित अवधि में रिपोर्ट जमा करने हेतु पाबंद करा गया है। ज्ञात रहे इस साल मार्च से लेकर सितंबर महीने तक ओरण क्षेत्र में कई जगह प्राचीन पेड़ों की कटाई हुई जिसका स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध भी किया और जून में इस बाबत श्री देगराय मन्दिर ट्रस्ट द्वारा भी जैसलमेर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था, स्थानीय प्रशासन द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर मन्दिर ट्रस्ट की तरफ से इसे राष्ट्रीय हरित न्यायालय, एनजीटी की भोपाल बेंच में, इंटेक बाड़मेर चेप्टर की तकनीकी मदद और जैसलमेर में गोडावण संरक्षण कार्यों में लगी ईआरडीएस फॉउंडेशन के साथ मिलकर याचिका दायर करी थी। मन्दिर ट्रस्ट की तरफ से सुमेरसिंह भाटी बताते हैं कि श्री देगराय मन्दिर ओरण क्षेत्र अतिसंकटग्रस्त राज्यपक्षी गोडावण के साथ 150 से ज्यादा किस्म के पक्षियों व वन्यजीवों का प्रमुख विचरण क्षेत्र है, वन विभाग का रासला गोडावण एनक्लोजर इसी ओरण क्षेत्र के पास स्थित है, इस क्षेत्र के अधिकाँश ग्रामीण आज भी पशुपालन पर निर्भर हैं और यह ओरण इनका मुख्य चारागाह भी है, जहाँ सदियों से पशुपालकों और वनयजीवों का एकसाथ अस्तित्व रहा है। पिछले महीने सितम्बर में ही इस ओरण में एक मादा गोडावण हाईटेंशन लाइन से टकराकर मर गई थी।


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