स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी के तहत 6 लाख टेली परामर्श सेवाएं दी

आखिरी 1 लाख टेली परामर्श सेवाओं का काम 15 दिन में पूरा किया गया ई-संजीवनी पर प्रतिदिन 8500 से अधिक टेली परामर्श सेवाओं के लिए पंजीकरण कि‍या गया

स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय की ओर से शुरू की गई टेलिमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी के तहत 6 लाख टेली परामर्श सेवाएं देने का काम पूरा कर लिया गया है। अंतिम 1 लाख टेली परामर्श सेवाएं देने का काम केवल 15 दिन में पूरा किया गया। इसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की डिजिटल इंडिया पहल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कोविड के समय में ई-संजीवनी डिजिटल प्‍लेटफॉर्म ने स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल करने वालों और चिकित्‍सा समुदाय के लिए अपनी उपयोगिता और आसान पहुंच को साबित किया है। तमिलनाडु, केरल और गुजरात जैसे राज्‍य सप्‍ताह के सातों दिन 12 घंटे ई-संजीवनी ओपीडी सेवा चला रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि धीरे-धीरे ई-संजीवनी मरीजों और डॉक्‍टरों के बीच किस तरह से लोकप्रिय होती जा रही है।

ई-संजीवनी सेवा पूरे भारत में 27 राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में सभी के लिए सुलभ कराई गई है। इस डिजिटल प्‍लेटफॉर्म पर 6000 से अधिक डॉक्‍टरों के माध्‍यम से ई-स्‍वास्‍थ्‍य परामर्श सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके जरिए 217 ऑनलाइन ओपीडी को मरीजों और डॉक्‍टरों के साथ जोड़ा गया है।

संजीवनी के माध्‍यम से राज्‍य अपने यहां छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए विशेष स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की पहुंच बढ़ा रहे हैं। ई-संजीवनी सेवा इन राज्‍यों लगभग 4000 स्‍वास्‍थ्‍य और आरोग्‍य केन्‍द्रों से संचालित की जा रही है जो जिला अस्‍पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बनाए गए 175 केन्‍द्रों से जुड़ी है। ई-संजीवनी की दो तरह की सेवाओं से 20,000 से अधिक चिकित्‍सक और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को जोड़ा गया है। वर्तमान समय में ई-संजीवनी के जरिए प्रतिदिन 8500 से अधिक टेली परामर्श सेवाएं दी जा रही हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा 13 अप्रैल, 2020 को पहले लॉकडाउन के दौरान ई-संजीवनी ओपीडी सेवा ऐसा समय में शुरू की गई थी जब देश भर के अस्‍पतालों में ओपीडी सेवा बंद कर दी गई थी। स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा नवम्‍बर, 2019 में शुरू की थी। यह सेवा दिसम्‍बर 2022 तक ‘हब एंड स्‍पोक मॉडल’ के रूप में भारत सरकार के आयुष्‍मान भारत योजना के तहत 1,55,000 स्‍वास्‍थ्‍य और आरोग्‍य केन्‍द्रों पर उपलब्‍ध कराई जाएगी। इस समय यह सेवा आयुष्‍मान भारत योजना के तहत लगभग 4000 स्‍वास्‍थ्‍य और आरोग्‍य केन्‍द्रों पर उपलब्‍ध कराई जा रही है। अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य और आरोग्‍य केन्‍द्रों में भी इसे शुरू करने का काम प्रगति पर है।

शीर्ष 10 राज्‍य जिन्‍होंने ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से सबसे अधिक टेली परामर्श सेवाएं दी हैं उनमें तमिलनाडु (203286), उत्तर प्रदेश (168553), केरल (48081), हिमाचल प्रदेश (41807), आंध्र प्रदेश (31749), मध्य प्रदेश (21580), उत्तराखंड (21451), गुजरात (16346), कर्नाटक (13703), और महाराष्ट्र (8747) शामिल हैं। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ई-संजीवनी को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य पारिस्थितिकी तंत्र और मानव संसाधन तथा बुनियादी ढांचा विकसित करने करने के लिए राज्‍य सरकारों के प्रयासों के पूरक की भूमिका में है। मंत्रालय विकास कार्यान्‍वयन, संचालन और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के प्रशिक्षण सहित तकनीकी सहायता सेवाओं के लिए सेंटर ऑफ डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कम्‍प्‍यूटिंग (सीडीएसी) की मोहाली शाखा की मदद ले रहा है।

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए ई-संजीवनी की उपयोगिता और सुगमता को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य वृद्धाश्रमों और जेलों में ई-संजीवनी ओपीडी सेवा शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।  

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*स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के ई-संजीवनी सेवा पर 28 अक्‍टूबर, 2020 तक 6 लाख से अधिक टेली परामर्श सेवाएं प्रदान की गईं।


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