सफल स्कारलेस गॉल ब्लैडर सर्जरी के बाद 22 वर्षीय पायलट उम्मीदवार ने ट्रेनिंग पुन: जारी किया

फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम में सिंगल इंसिजन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद से सिलीगुड़ी निवासी 22 वर्षीय पायलट उम्मीदवार के पित्ताशय में पथरी का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। अच्छी बात यह रही की यह सर्जरी मरीज की ट्रेनिंग को जारी रखने में सहायक रही।

मरीज के पेट के निचले हिस्से में कई दिनों से तेज दर्द हो रहा था, जो उसकी ट्रेनिंग प्रक्रिया में एक बाधा बन चुकी था। उसने फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम द्वारा नियमित रूप से संचालित ओपीडी में जांच कराने का फैसला किया। अल्ट्रासाउंड व अन्य परीक्षणों से पित्ताशय में पथरी का पता चला। मरीज का भविष्य खराब न हो इसलिए पथरी को जल्द से जल्द निकालना जरूरी था।

युवा पायलट उम्मीदवार इस बात से बेहद चिंतित था कि कहीं सर्जरी के कारण उसका करियर खराब न हो जाए, जिसमें कट, मेटल क्लिप्स आदि चीजें शामिल थीं। मरीज को एडवांस स्कारलेस प्रक्रिया के बारे में बताया गया, जिसके बाद वह सर्जरी के लिए तैयार हो गया। हाल ही में वह फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम में स्कारलेस लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी से गुज़रा, जिसके बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और ट्रेनिंग को पुन: जारी कर चुका है।

गुरूग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल में मिनिमल एक्सेस बैरियाट्रिक एंड जी आई सर्जरी के वरिष्ठ सलाहकार, डॉक्टर बिजेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि, “पित्ताशय की मल्टीपोर्ट गॉल ब्लैडर सर्जरी में पेट में 4 कट लगाने पड़ते हैं और रिकवरी में भी बहुत समय लगता है। जबकी सिंगल इंसिजन लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (एसआईएलएस), लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का एक बिल्कुल नया और अनोखा तरीका है। इसमें टांको की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती है। इस तकनीक में नाभि के बिल्कुल बीचों-बीच 12 एमएम (1/2 इंच) छोटा केवल एक चीरा लगाना पड़ता है। कट छोटा होने के कारण मरीज को दर्द कम होता है, रिकवरी जल्दी होती है और वह 4-5 दिनों में सामान्य जीवन में वापस लौट सकता है।” 

फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम विश्व स्तर पर एसआईएलएस पित्ताशय का सबसे अधिक संख्या में उपयोग करता है। बेहतरीन कौशन और गंभीर ट्रेनिंग की जरूरत के साथ, यह तकनीक केवल कुछ ही केंद्रों में नियमित रूप से इस्तेमाल की जाती है।

युवा मरीज ने बताया कि, “ 5 दिनों से मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था लेकिन इसका कारण समझ नहीं आ रहा था। मुझे खुशी है कि मैंने सिलीगुड़ी के बालाजी हेल्थकेयर में संचालित ओपीडी में डॉक्टर सिन्हा से परामर्श लिया। उनकी मदद से फोर्टिस अस्पताल, गुरूग्राम में मेरी सर्जरी की गई। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ और मेरे शरीर पर कोई निशान या मेटल भी नहीं हैं। इस मदद के लिए मैं सभी डॉक्टरों का दिल से शुक्रिया करता हूँ।”


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