कविता: कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है

कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
_x000D_ कौन तुझे एकता के लिए अंकित करेंगे
_x000D_ कौन तेरा रक्त तिलक कर विजयी करेंगे
_x000D_ कौन तेरा मार्गदर्शन कर होंसला अफजाई करेंगे
_x000D_ कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
_x000D_ रक्त उफन कर लगा रहा है आवाज अब नहीं रूकेंगे
_x000D_ सेना का राष्ट्रीय गीत भरता जोशदीप अब नहीं रूकेंगे
_x000D_ यह युद्ध अलग है इसकी निती में समझ है अब नहीं रूकेंगे
_x000D_ रणभेरी बजने लगी रण को लहु की प्यास है अब नहीं रूकेंगे
_x000D_ कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
_x000D_  सब अकेले जहर से युद्ध लड़ेंगे अदभुत दृश्य है अब नहीं झुकेंगे
_x000D_  कोई नज़र में नहीं शत्रु तो वायु बनकर मार रहा है अब नहीं झुकेंगे
_x000D_  शरीर शत्रु का भोजन एक से दुसरे को बचाना है अब नहीं झुकेंगे
_x000D_  कुछ दिन युद्ध घर के द्वार पर से शत्रु लोटेगा बचाव ही वार है अब नहीं झुकेंगे
_x000D_  कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
_x000D_  सांसो से सांसे पकड़ने लगी अब इसकी खैर नहीं अब मैं मिलूंगा नहीं हम डटकर लड़ेंगे‌।
_x000D_  कर्तव्य राष्ट्र के प्रति सबको बचाना है धीरज हथियार बना है हम डटकर लड़ेंगे
_x000D_ गद्दार भ्रमित हो जहर फैला रहे खुद की मृत्यु खुद गले लगा रहे हैं हम डटकर लड़ेंगे
_x000D_  यह राष्ट्र कुछ निराला है यहां भारत माता ने इसको पाला है हम डटकर लड़ेंगे
_x000D_  युद्ध के परिणाम ऐसे होंगे जहर भागेगा जीत की ध्वजा हर घर पर लहरायेगी,
_x000D_ रोशन रोशन बंद पड़े मंदिर मस्जिद होंगे अंधियारे में दिया जलेगा,
_x000D_ गद्दारों की रूह  भारत माता से माफी मांगेंगी, सृष्टि बचाने प्रकृति के नियमों का निर्माण होगा,
_x000D_  अब डटकर लड़ेंगे, अब नहीं रूकेंगे, अब नहीं झुकेंगे,
_x000D_ कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है
_x000D_ कदम बढ़ा रूक मत यह देश तेरा है

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लेखक:  भूपेंद्र सिरसुॅ


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