प्रदूषण नियंत्रण मेंं सरकारी संस्थानों की भूमिका विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

 

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जयपुर। पर्यावरण विभाग एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बम्बई के सहयोग से शुक्रवार को राज्य में प्रदूषण नियंत्रण एवं इसमें सरकारी संस्थानों की भूमिका विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में मुख्य सचिव  डी.बी. गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण की कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञो एवं विभिन्न क्रियान्वयन संस्थाओं को एक मंच पर लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ऎसे कार्यक्रम निरन्तर आयोजित किये जाने पर बल दिया। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अध्यक्ष  पवन कुमार गोयल ने कहा कि विभिन्न विभागों में अधिक समन्वय स्थापित होना चाहिए जिससे प्रदूषण नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही की जा सके। तकनीकी -संस्थानों के सहयोग से ऎसी कार्यशालाएँ राष्ट्रीय स्तर पर भी आयोजित करायी जाये जिससेे विभिन्न राज्यों में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण एवं अपशिष्ट प्रबन्धन हेतु  किये जा रहे अच्छे कार्याें की जानकारी सभी से साझा की जा सके। पर्यावरण विभाग की प्रमुख शासन सचिव  श्रेया गुहा ने कहा कि वर्तमान में स्थानीय स्तर की समस्याओं को हल करने के लिए क्षेत्रीय एवं भौगोलिक परिस्थितियोें को ध्यान में रखते हुए कम लागत के व्यावहारिक एवं आसानी से लागू किये जा सकने वाले समाधान खोजने की आवश्यकता है। इसके लिए अनुसंधान, विकास एवं तकनीकी उन्नयन के माध्यम से सक्षम तकनीक विकसित करने की जरूरत है। पर्यावरण विभाग के सचिव डॉ. नारायण पाण्डेय एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की सदस्य सचिव  शैलजा देवल ने कार्यक्रम को पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में प्रभावी बताते हुए कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण में जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता प्रतिपादित की । कार्यशाला में राज्य प्रदूषण नियन्त्रण मण्डल द्वारा आई.आई.टी. बम्बई एवं अन्य संस्थानों के सहयोग से एक स्वतन्त्र उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना किये जाने पर जोर दिया गया। उत्कृष्टता केन्द्र द्वारा प्रभावी अनुसंधान द्वारा क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये समाधान विकसित करने की आवश्यकता प्रतिपादित की गयी। कार्यशाला में राज्य प्रदूषण नियन्त्रण मण्डल द्वारा नियमों की अनुपालना ना करने वाली इकाईयो के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने एवं राज्य में प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण व अपशिष्ट प्रबन्धन के लिए कार्य योजना बनाने पर विस्तार से चर्चा की गयी।


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