समय पर जांच के साथ आँखों की कई समस्याओं की रोकथाम संभव – एआईओएस

एआईओएस ने अंधेपन की रोकथाम पर सार्वजनिक जागरुकता बढ़ाई

विश्व दृष्टि दिवस/वर्ल्ड साइट डे 2020 – 8 अक्टूबर 2020

नई दिल्ली: कोविड काल में डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण देश में कमज़ोर आँखों वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। विश्व दृष्टि दिवस 2020 के अवसर पर, ऑल इंडिया ऑप्थेल्मोलॉजी सोसाइटी (एआईओएस) ने देश में संभावित अंधेपन की रोकथाम पर सार्वजनिक जागरुकता बढ़ाई। लोगों को आँखों की समस्याओं की रोकथाम और अंधेपन को नियंत्रित करने के लिए समय पर जांच के महत्व के बारे में शिक्षित करना बेहद जरूरी है।

हर साल, अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस की तरह मनाया जाता है, जो रोकथाम योग्य अंधेपन और कमज़ोर आँखों के बारे में जागरुकता बढ़ाने का उद्देश्य रखता है। डब्ल्यूएचओ का इस साल का थीम #होपइनसाइट है, जो कमज़ोर आँखों की रोकथाम पर केंद्रित है।

सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और एआईओएस अध्यक्ष, डॉक्टर महिपाल सिंह सचदेव ने बताया कि, “बदलती जीवनशैली और हर उम्र के लोगों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अधिक इस्तेमाल के साथ, कमज़ोर आँखों के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। जबकी इन समस्याओं की रोकथाम संभव है। विश्व स्तर पर, मोतियाबिंद को अंधेपन का नंबर-1 कारण माना जाता है, जिसकी रोकथाम संभव होने के साथ इलाज भी संभव है। जबकी ग्लूकोमा यानी कि काला मोतिया को ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन उसके द्वारा आँखों पर हो रहे असर को धीमा जरूर किया जा सकता है। भारत में, आँखों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए निवारक उपायों का पालन जल्द से जल्द शुरू करने की आवश्यकता है।”

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 30 करोड़ की आबादी अंधेपन और कमज़ोर आँखों का शिकार है। जिसमें 85% आबादी विकासशील देशों से है, जो एक बड़ी चिंता का विषय है। इन आंकड़ों के आधार पर, जहां विकासशील देश इन समस्याओं का हब बने हुए हैं, इस साल डब्ल्यूएचओ ने इन देशों की ओर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। चूंकि, इसमें भारत का एक बड़ा योगदान है, जहां समस्याओं की रोकथाम संभव होने के बाद भी अंधेपन का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। समय पर कदम न उठाने और अन्य स्त्रोंतों की उपलब्धता न होने के कारण 2025 तक ये आंकड़े दोगुने हो सकते हैं।

ऑप्थ आरपी सेंटर की प्रॉफेसर और एआईओएस की महासचिव, डॉक्टर नम्रता शर्मा ने बताया कि, “लोगों में रोकथाम के तरीकों और शुरुआती निदान के बारे में जागरुकता बढ़ाकर ही स्वस्थ दृष्टि को सुनिश्चित किया जा सकता है। टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ, आज काला मोतिया, मोतियाबिंद और डायबेटिक रेटिनोपैथी जैसी बड़ी समस्याओं के कारण आँखों की रौशनी को कमज़ोर होने से आसानी से रोका जा सकता है। लेज़र टेक्नोलॉजी मिनिमली इनवेसिव और ऑटोमेटेट होती है, जो बेहतर परिणामों के साथ तेज रिकवरी भी प्रदान करती है। समय पर निदान और उपचार जरूरी है क्योंकि कोला मोतिया और डायबेटिक रेटिनोपैथी के कारण होने वाले अंधेपन की रोकथाम तो संभव है लेकिन इलाज संभव नहीं है। दोनों बीमारियों की रोकथाम के लिए शुरुआती जांच जरूरी है इसलिए नियमित रूप से आँखों का चेकअप जरूर कराएं।”


सांगरी टाइम्स हिंदी न्यूज़ के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और टेलीग्राम पर जुड़ें .
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBEचैनल को विजिट करें